बुद्ध पूर्णिमा क्यूँ मनाते हैं ?

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बुद्ध पूर्णिमा क्यूँ मनाते हैं ?

बुद्ध पूर्णिमा क्यूँ मनाते हैं ?

तथागत गौतम बुद्ध को हम सभी जानते हैं । पर क्या हम ये जानते हैं की बुद्ध पूर्णिमा क्यूँ मनाई जाती हैं । बहुत से लोगो को यह पता भी होगा की बुद्ध पूर्णिमा क्यूँ मनाई जाती हैं।ओर बहुत से लोगों को इसकी जानकारी नहीं होगी ,तो आइए जानते है बुद्ध पूर्णिमा क्यूँ मनाते है।

बुद्ध पूर्णिमा, बुद्ध पूर्णिमा क्यूँ मनाए जाती हैं

बुद्ध पूर्णिमा बौद्धों के लिए बहोत पवित्र त्योहार है । बुद्ध पूर्णिमा को बुद्ध जयंती के रूप में भी मनाया जता हैं । यह वैशाख महिने की पूर्णिमा जो आमतौर पर अप्रिल या मई में आती हैं जिसे बुद्ध पूर्णिमा ( वैशाख पूर्णिमा ) भी कहा जाता है । इसी दिन तथागत गौतम बुद्ध का जन्म हुआ था ,इसी दिन उन्हें ज्ञान की प्राप्ति हुई थी ,ओर इसी दिन उनका महनिर्वान हुआ था। इसीलिए इसी दिन बुद्ध पूर्णिमा मनाई जाती है

बुद्ध पूर्णिमा के दिन क्या करना चाहिए ।

  1. आज के दिन हमें झूठ नहीं बोलना चाहिए ।
  2. इस दिन हमें किसी भी प्रकार से मनुष्य और पशुओं को हानि नही पहुचानी चाहिए ।
  3. किसी भी प्रकार से इस दिन हमें बिलकुल भी मांस युक्त भोजन नहीं करना चाहिए ।
  4. जितना हो सके इस दिन गरीबों को भोजनदान करना चाहिए।

बुद्ध का जीवन

कपिल वस्तु यह शाक्यों की राजधानी थी । शाक्यों के राजा शुधोधन थे । शुधोधन का विवाह सुंदेर महामाया से हुआ । लूमबिनी ( कपिल वस्तु के पड़ोस मैं , जो भारत के गोरखपूर जिले के उत्तर मैं स्तिथ है ) नाम के जंगल मैं ५६३ ईसा पूर्व वैशाक पूर्णिमा के दिन महामाया ने राजपुत्र को जन्म दिया। मानवता के महानतम शिक्षक के जन्म स्थान के रूप में इसकी यादगार बनाए रखे के लिए और तीर्थ स्थान के प्रति अपनी पूजा की भावना के अभिव्यकती के लिए २३९ ईसा पूर्व मैं सम्राट अशोक ने यहाँ एक पथर का खम्भा गडवा दिया था । उस खम्भे पर ये शब्द लिखे गए हैं ।

“ यहाँ भगवान का जन्म हुआ था ”

राजा ने उनका नाम सिद्धार्थ रखा। सिद्धार्थ सात दिन के थे जब हुए तभी रानी महामाया का निधन हो गया । इसके बाद सिद्धार्थ का लालन – पोषण उनकी मौसी महाप्रजापति ने किया । अपने जीवन के शुरू के काल में सिद्धार्थ का जीवन आनंद से बिता । सोलह वर्ष की आयु में उनका विवाह दंडपाणि के पुत्री यशोधरा से हुआ। सिद्धार्थ का वैवाहिक जीवन तेरह वर्ष सुखपूर्वक बीता।उनको एक पुत्र हुआ था उसका नाम राहुल रखा था ।

कुमार अवस्था

गौतम बुद्ध २० वर्ष की आयु होने पे सभी शाक्यौं को शाक्य संघ मैं जाके शिक्षित होना पड़ता था । और संघ का सदस्य होना जर्रूरी होता था । सिद्धार्थ को ८ वर्ष बीत चुके थे सदस्य बन के जब एक प्रकरण शुरू हुआ और वो था शाक्य और कोलियोँ का रोहिणी नदी के पानी के बटवारे को लेके था । जिसमें सिद्धार्थ इस बटवारे के कारन होने वाले युद्ध के विरुद्ध थे । ये मुद्दा संघ में अल्पमत था पैर गौतम अपनी बात पे अटल रहे इस वजह से संघ ने उन्हें प्रवज्या की अनुमति दी ।

त्याग

तथागत गौतम बुद्ध २९ वर्ष के आयु में उन्होंने सभी ऐश्वर्य का त्याग कर दिया । उन्होंने राजमहल, संपत्ति, सुन्दर पत्नी, और अपने प्रिय पुत्र का त्याग कर दिया क्यूंकि वो पुरे विश्व के लोगो के लोगो के लिए सुख की तलाश करना चाहते थे ।बुद्ध ६ वर्ष तक साधु बन के विद्वानो से मिलके अपनी जिज्ञासा को शांत करने के कोशिश करते रहे । लेकिन अंत में उन्होंने ४ सप्ताह तक पीपल के वृक्ष के निचे ध्यान किया उनको ज्ञान प्राप्त हुआ । पीपल के वृक्ष के नीचे ज्ञान प्राप्त हुआ इसलिए इस वृक्ष को बोधि वृक्ष भी कहते है।ज्ञान प्राप्ति के बाद बोधिसत्व बुद्ध बन गये । बुद्ध को सच्चे सुख का मार्ग प्राप्त हुआ उनको मालूम था का ये जीवन दुखमय है । इसलिए उन्होंने तीन बातें विश्व के सामने राखी ।

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  • मन को शुद्ध रखो ।
  • कोई भी गलत कार्य नहीं करें ।
  • हमेशा अच्छा कार्य करे ।

तो इस प्रकार आज हमने ये प्रयत्न किया के आपको बुद्ध पूर्णिमा के बारे मैं जानकारी दे सके। हम आशा करते है के आपको ये जानकारी प्राप्त करके आपको अच्छा लगा होगा । अगर हमसे कोई त्रुटि हो गयी हो तो हम क्षमा चाहते है । आप अपने विचार या कोई भी सुझाव देना चाहते है तो आप कॉमेंट बॉक्स मैं लिख सकते है ।

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2 COMMENTS

  1. Great !हमारा देश विभिन्न सांस्कृतिक परम्पराओ से सींचा हुआ देश है. तथागत के संस्कार इस भूमि की पौराणिक सम्पदा को और भी मूल्यवान बनाते है.

  2. A very interesting write up.Many of us are unaware of the importance of this Day Keep us enlightened with such inspirational writings

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